# **साँसों में बसी एक अनकही महक**

# **साँसों में बसी एक अनकही महक**


# **साँसों में बसी एक अनकही महक**


कुछ खुशबुएँ फूलों से नहीं आतीं,

वे उन लोगों से आती हैं

जो कभी हमारी ज़िंदगी का सबसे सुंदर मौसम हुआ करते थे।


आज भी जब सुबह की पहली किरण

मेरी खिड़की पर दस्तक देती है,

मैं अनायास मुस्कुरा उठता हूँ।

न जाने क्यों लगता है

मानो हवा अपने आँचल में

तुम्हारी कोई अधूरी बात बाँध लाई हो।


मैंने समय को बदलते देखा है,

मौसमों को रंग बदलते देखा है,

नदियों को रास्ते बदलते देखा है,

पर एक चीज़ आज तक नहीं बदली—

मेरे भीतर बसी

वह कोमल-सी महक,

जो किसी इत्र की नहीं,

किसी फूल की नहीं,

बल्कि तुम्हारी यादों की है।


कभी-कभी लगता है

प्रेम का असली घर दिल नहीं होता,

वह तो साँसों में बसता है।

हर साँस के साथ

वह भीतर उतरता है,

और हर धड़कन के साथ

एक नया गीत बन जाता है।


तुमसे पहली मुलाक़ात

जैसे किसी सूखी धरती पर

बरसात की पहली बूँद हो।

न कोई शोर था,

न कोई वादा,

बस आँखों में उतरती हुई

एक अनजानी रोशनी थी।


तुम्हारी मुस्कान

उस सुबह जैसी थी

जिसमें सूरज धीरे-धीरे

धुंध को हटाता है।

तुम्हारी आवाज़

मानो किसी मंदिर की घंटी हो,

जो मन की सारी बेचैनियों को

शांत कर देती है।


मैंने कभी तुम्हें

शब्दों में बाँधने की कोशिश नहीं की।

क्योंकि कुछ लोग

कविताओं में नहीं समाते,

वे स्वयं कविता बन जाते हैं।


तुम्हारे साथ बिताए हुए पल

आज भी मेरे दिनों की सबसे कीमती पूँजी हैं।

जब-जब दुनिया थका देती है,

मैं उन यादों की छाँव में बैठ जाता हूँ।

वहाँ न कोई शिकायत होती है,

न कोई डर,

सिर्फ़ अपनापन होता है।


लोग पूछते हैं,

"क्या प्रेम सचमुच कभी खत्म नहीं होता?"


मैं मुस्कुरा देता हूँ।

क्योंकि अगर प्रेम खत्म हो जाता,

तो तुम्हारे जाने के बाद

मेरे भीतर यह उजाला क्यों रहता?


कई रातें ऐसी आईं

जब चाँद पूरा था,

पर मेरी दुनिया अधूरी थी।

मैंने आसमान से पूछा,

"क्या तुमने उसे देखा है?"

सितारों ने कुछ नहीं कहा,

लेकिन उनकी खामोशी में

मुझे तुम्हारी मुस्कान सुनाई दी।


बरसात जब भी आती है,

भीगी मिट्टी की खुशबू

तुम्हारी यादों को फिर से जगा देती है।

हर बूँद जैसे कहती है—

कुछ रिश्ते कभी पुराने नहीं होते।


मैंने तुम्हें भूलने की

बहुत कोशिश की।

नई राहें चुनीं,

नए शहर देखे,

नई भीड़ में खुद को खोया।

लेकिन हर मोड़ पर

तुम्हारी कोई न कोई याद

मेरा हाथ पकड़ लेती थी।


शायद प्रेम का अर्थ

साथ रहना नहीं होता।

कभी-कभी प्रेम का अर्थ

दूर रहकर भी

किसी की खुशी के लिए

दुआ करते रहना होता है।


आज भी जब किसी बगीचे में

कोई गुलाब खिलता है,

मैं उसकी पंखुड़ियों को देखकर

तुम्हारी हँसी याद करता हूँ।

जब कोई बच्चा बेफ़िक्र होकर हँसता है,

मुझे तुम्हारी मासूमियत याद आती है।


तुमने कभी कहा था,

"अगर कभी हम दूर हो जाएँ,

तो उदास मत होना।

जहाँ भी खुशबू महसूस हो,

समझ लेना मैं वहीं हूँ।"


शायद उसी दिन से

हवा मेरी सबसे अच्छी दोस्त बन गई।

वह हर रोज़

तुम्हारी कोई न कोई निशानी

मेरे पास छोड़ जाती है।


समय ने मेरे बालों में

सफेदी भर दी,

चेहरे पर लकीरें लिख दीं,

लेकिन तुम्हारे लिए जो प्रेम था,

वह आज भी

पहले दिन जितना निर्मल है।


मैंने समझ लिया है

कि प्रेम का अंत

विछोह नहीं होता।

प्रेम का अंत तब होता है

जब इंसान महसूस करना छोड़ दे।

और मैं आज भी महसूस करता हूँ—

बारिश में,

धूप में,

चाँदनी में,

हवा की हर लहर में।


कभी-कभी मैं सोचता हूँ,

अगर जीवन एक किताब है,

तो तुम उसका सबसे सुंदर अध्याय हो।

भले ही वह अध्याय समाप्त हो गया हो,

लेकिन पूरी किताब

उसी की रोशनी से चमकती है।


मेरे सपनों में

आज भी तुम्हारे कदमों की आहट आती है।

मैं जाग जाता हूँ,

पर निराश नहीं होता।

क्योंकि कुछ मुलाक़ातें

सिर्फ़ सपनों के लिए ही बनी होती हैं।


मैंने अब शिकायत करना छोड़ दिया है।

क्योंकि जिसने प्रेम दिया,

उसने जीवन को अर्थ दिया।

चाहे वह साथ रहा हो या नहीं।


तुम्हारी यादें

अब दर्द नहीं देतीं।

वे दीपक बन गई हैं,

जो अँधेरे दिनों में

मुझे रास्ता दिखाती हैं।


अगर कभी कोई मुझसे पूछे

कि दुनिया की सबसे कीमती चीज़ क्या है,

तो मैं किसी हीरे का नाम नहीं लूँगा,

न किसी महल का।


मैं कहूँगा—

किसी सच्चे दिल की वह याद,

जो वर्षों बाद भी

मन को मुस्कुराना सिखा दे।


मैंने जाना है

कि प्रेम जीतने का नाम नहीं,

समर्पण का नाम है।

किसी को अपना बनाने का नहीं,

किसी के लिए बेहतर इंसान बन जाने का नाम है।


और यदि कभी

किस्मत हमें फिर मिलाए,

तो मैं कोई शिकायत नहीं करूँगा।

मैं सिर्फ़ इतना कहूँगा—

"धन्यवाद।

तुमने मुझे प्रेम का अर्थ सिखाया।"


यदि वह मुलाक़ात कभी न भी हो,

तो भी मुझे अफ़सोस नहीं होगा।

क्योंकि तुमने जो एहसास दिए,

वे किसी जीवन से कम नहीं।


आज भी जब मैं

धीरे-धीरे साँस लेता हूँ,

मुझे लगता है

मानो जीवन की हर धड़कन

एक अनदेखा गीत गा रही हो।


उस गीत में

तुम्हारा नाम नहीं,

तुम्हारी मौजूदगी है।


उस हवा में

तुम्हारा चेहरा नहीं,

तुम्हारा स्पर्श है।


उस रोशनी में

तुम्हारी परछाई नहीं,

तुम्हारा विश्वास है।


और मेरी हर साँस में

कोई शब्द नहीं,

एक शांत, गहरा, अमर प्रेम है।


शायद इसी का नाम प्रेम है—

जो समय से नहीं हारता,

दूरी से नहीं टूटता,

मौन से नहीं मिटता।


वह बस एक हल्की-सी महक बनकर

जीवन के हर मौसम में

साथ चलता रहता है।


जब तक यह साँसें चलती रहेंगी,

यह एहसास भी जीवित रहेगा।

और जिस दिन आख़िरी साँस होगी,

वह भी शायद

इसी महक के साथ

आसमान की ओर उड़ जाएगी।


क्योंकि कुछ प्रेम कहानियाँ

समाप्त नहीं होतीं—

वे हवा बन जाती हैं,

बारिश बन जाती हैं,

चाँदनी बन जाती हैं,

और फिर हर उस दिल में बस जाती हैं

जो सच्चे प्रेम पर विश्वास करता है।


# **साँसों में बसी एक अनकही महक**


यही मेरी दुआ है—

जहाँ भी तुम रहो,

तुम्हारे चारों ओर

खुशियों की रोशनी रहे,

सपनों की हरियाली रहे,

और प्रेम की वह पवित्र महक

कभी कम न हो।


मैं यहाँ रहूँ या न रहूँ,

मेरी प्रार्थना, मेरी कविता,

और मेरा स्नेह

हमेशा तुम्हारे साथ रहेगा।


क्योंकि सच्चा प्रेम

नाम से नहीं,

दूरी से नहीं,

समय से नहीं—


बल्कि उस अदृश्य सुगंध से पहचाना जाता है

जो एक बार दिल में बस जाए,

तो पूरी ज़िंदगी

हर साँस क

एक सुंदर कविता बना देती है।


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